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CARO 2016 #pdf
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1528 GI/2016 (1) jftLVªh laö Mhö ,yö&33004@99 REGD. NO. D. L.-33004/99 vlk/kj.k EXTRAORDINARY Hkkx II—[k.M 3—mi&[k.M (ii) PART II—Section 3—Sub-section (ii) izkf/dkj ls izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY la- 757 ] ubZ fnYyh] eaxyokj] ekpZ 29] 2016@pS=k 9] 1938 No. 757] NEW DELHI, TUESDAY, MARCH 29, 2016/CHAI TRA 9, 1938 कारपोरेट काय मं ालय कारपोरेट काय मं ालय कारपोरेट काय मं ालय कारपोरेट काय मं ालय आदेश आदेशआदेश आदेश नई दली , 29 माच , 2016 का.आ. का.आ. का.आ. का.आ. 1228 12281228 1228 (अ). (अ).(अ). (अ).– –– – के ीय सरकार, कं पनी अिधिनयम, 2013 (2013 का 18) क! ध ारा 143 क! उपधारा (11) $ारा %द& शि(य) का %योग करते -ए तथा कं पनी अिधिनयम, 20 13 क! धारा 143 क! उपधारा (11) के परंतुक के अधीन ग1ठत सिमित से परामश करके , का.आ. सं5या 990(अ), तारी ख 10 अ%ैल, 2015 $ारा भारत के राजप<, असाधारण, भाग - 2, खंड-3, उपखंड (ii ) म> %कािशत कं पनी (लेखापरी?क क! 1रपोट ) आदेश, 2015 को अिधAांत करते -ए, िसवाय उन बात) के िजह> ऐसे अिधAमण से पूव कया गया या करने से लोप कया गया है, िनGिलिखत आदेश करती है, अथा त्:- 1. संि नाम, लागू होना और ारंभ. संि नाम, लागू होना और ारंभ. संि नाम, लागू होना और ारंभ. संि नाम, लागू होना और ारंभ. - -- - (1) इस आदेश का संि?J नाम कं पनी (लेखापरी?क क! 1रपोट ) आदेश, 2016 है। (2) यह %Mयेक कं पनी िजसम> िवदेशी कं पनी जो कं पनी अिधिन यम, 2013 क! धारा 2 के खंड 42 (2013 का 18) के अंतग त प1रभािषत है शािमल है (इसके पPात् कं पनी अिधिनयम कहा गया है) लागू होगा। (i ) एक बQककारी कं पनी जैसा बQकग िविनयमन अिधिनयम, 1949 (1949 का 10) क! धारा 5 खंड ग म> यथा प1रभािषत है। (ii) एक बीमा कं पनी जो बीमा अिधिनय म, 1938 (1938 का 4) म> यथा प1रभािषत है। (iii ) कं पनी िजसे कं पनी अिधिनयम क! धारा 8 के अंतग त प1रचाल न का अनुRाप< दया गया है। (Iv ) एकल Sि( कं पनी जो कं पनी अिधिनयम क! धारा खंड 62 म> औ र लघु कं पनी जो कं पनी अिधिनयम क! धारा 2 म> खंड 85 के अंतग त यथाप1र भािषत है और (v ) एक %ाइवेट िलिमटेड कं पनी जो पिVलक कं पनी क! अनुषंगी या िनयं<ी कं पनी नहW है िजसक! तुलनप< तारीख को %द& पूंजी और िनिधयां और अिधXय एक करोड़ से अिधक नहW है िजसक े कसी बQक या िव&ीय संZथा[ म> िव& वष के कसी समय पर कु ल उधार 1 करोड़ \पए से अिधक नहW है और उसका कु ल राजZव िजसे कं पनी अिधिनयम, 2013 क! अऩुसूची 3 म> बताया गया है (छोड़ गए काय चालन से %ाJ राजZव भी शािमल ) िव&ीय िववरण के अऩुसार िव&ीय वष के दौरान दस करोड़ \पए से अिधक नहW है। 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(ii)] (3) यह राजप< म> %काशन क! तारीख को %वृ& होगा। 2. लेखापरीक क रपोट म! पैरा 3 और पैरा 4 म! अंत'व ) मामले शािमल ह+गे. 2. लेखापरीक क रपोट म! पैरा 3 और पैरा 4 म! अंत'व ) मामले शािमल ह+गे. 2. लेखापरीक क रपोट म! पैरा 3 और पैरा 4 म! अंत'व ) मामले शािमल ह+गे. 2. लेखापरीक क रपोट म! पैरा 3 और पैरा 4 म! अंत'व ) मामले शािमल ह+गे. - -- - लेखापरी?क $ारा कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 143 के अंतग त %Mयेक कं पनी के लेख) िजसक! लेखापरी?ा उसके $ारा क! जाती है िजस पर यह आदेश िव&ीय वष जो 1 अ%ैल, 2015 से या इसके बाद लागू होता है क! 1रपोट तैयार क! जाती है पैरा 3 और 4 म> िविनaदb मामल) के अित1र( जैसा लागू हो अंतcवb ह)गे : परंतु यह आदेश लेखापरी?क क! समेकत िव&ीय कथन) पर लागू न ही होगा। 3. लेखापरीक क रपोट म! 3. लेखापरीक क रपोट म! 3. लेखापरीक क रपोट म! 3. लेखापरीक क रपोट म! सि,मिलत -कए जाने वाले मामले. सि,मिलत -कए जाने वाले मामले. सि,मिलत -कए जाने वाले मामले. सि,मिलत -कए जाने वाले मामले. - -- - कं पनी के लेख) पर लेखा परी?क क! 1रपोट िजस पर यह आदेश लागू है म> िनGिलिखत मामले पर एक कथन शािमल होगा य था (i ) (क) Xया कं पनी उिचत अिभलेख) का संधारण कर रही है िजसम > पूण िविशिbयां िजसम> िनयत आिZतय) का प1रणाMमक िववरण एवं िZथित शािमल हQ दशा या गया हो। (ख) Xया इन िनयत आिZतयां का भौितक सMयापन %बंधन $ारा प या J अंतराल म> कया गया, Xया ऐसे सMयापन म> कोई सारवान असंगतता देखी गई, यद हां, Xया उनका लेखाबिहयां म> उिचत तरीके से िनबटान कया गया। (ग) Xया Zथावर संपि&य) के हक िवलेख कं पनी के नाम रखे गए है यद नहW तो तMसंबंधी Vयौरे उपलVध कराव>। (ii ) Xया मालसूची का भौितक सMयापन पया J अंतराल पर %बंधन $ा रा कया गया और Xया कोई सारवान असंगतता देखी गई, यद हां तो Xया उनका लेखाबिहय) म> युि(यु( तरीके से बता व कया गया। (iii ) Xया कं पनी ने कसी कं पनी, फमe, सीिमत दाियMव भागीदा री या अय प?कार) को जो कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 189 के अधान रिजZटर म> शािमल होते है, को कोई सुर ि?त या असुरि?त उधार दया है। (क) Xया ऐसे उधार के आवेदन क! िनबंधन और शतf कं पनी के िह त के िवgh है। (ख) Xया मूल क! %ितसंदाय और Vयाज के भुगतान क! अऩुसूची क! अनुबh लगाई गई थी और Xया पुनअ दायिगयां अथवा %ािJयां िनयिमत है ; (ग) यद रािश लंबे समय से अितशोiय है तो कु ल रािश जो नV बे दन से अितशोiय है, का िववरण द>, Xया कं पनी $ारा मूल एवं Vयाज क! वसूली के िलए युि(यु( कदम उठाए गए हQ ; (iv ) उधार, िविवधान, %Mयाभूितयां और सुर?ा के संबंध म> Xया कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 185 और 186 के उपबंध) का पालन कया गया, यद नहW तो तMसंबंधी Vयौर> द>। (v) यद कं पनी ने िन?ेप Zवीकार क! है, Xया भारतीय 1रजव बQक और कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 73 से 76 तक के उपाबंध या अय सुसंगत उपाबंध) के अंतग त जारी िनदेश) और उस के अंतग त बनाए गए िनयम), जहां लागू हो का पालन कया गया यद नहW तो ऐसे उलंघन) क! %कृ ित का कथन कर>। यद कं पनी िविध बोड या राkीय कं पनी िविध अिधकरण या भारतीय 1रजव बQक या कसी यायालय या अय कसी अिधकरण न े कोई आदेश पा1रत कया है, Xया उसका अनुपालन कया गया है या नहW ? (vi ) Xया कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 148 क! उपधारा 1 क े अधीन क> ीय सरकार ने लागत अिभलेख) के अनुर?ण को िविनaदb कया था और Xया ऐसे लेखे एवं अिभलेख बनाए और उनका अऩुर?ण कया गया। (vii ) (क) Xया कं पनी अिववादत कानूनी बकाया िजसम> भिवlय िन िध, कम चारी राmय बीमा, आयकर, िबA! कर, सेवा कर, सीमाशुक, उMपाद शुक, वैट, उपकर और कोई अय कानूनी बकाया उिचत %ािधका1रय ) को जमा कराने म> िनयिमत है और यद नहW तो कानूनी बकाया के ए1रयर क! रािश संबंिधत िव& ीय वष के अंितम दवस के अनुसार उनके अदा करने क! ितिथ से छह महीन) से अिधक के िलए दशा या जाए। ¹Hkkx IIµ[k.M 3(ii)º Hkkjr dk jkti=k % vlk/kj.k 3 (ख) Xया आयकर, िबA!कर या सेवाकर या सीमा शुक और उMपाद शुक या मूयवcधत कर कसी िववाद के कारण जमा नहW कराए गए है तो िनिहत रािश और फोरम जहां िववाद लंिबत है उसका वण न कया जाएगा (संबंिधत िवभाग को के वल अnयावेदन देने को िववाद नहW माना जाएगा। (viii ) Xया कं पनी ने िव&ीय संZथा, बQक, सरकार या िडब>चरधारी को देय के ऋण) अथवा उधारी क! पुनः %ितसंदाय म> चूक क! है ? यद हां तो चूक क! अविध एवं रािश सूिचत क! जाए (बQको, िव &ीय संZथा[ और सरकार को चूक के मामलो म> ऋण अनुसार िववरण द>)। (ix ) Xया धनरािश जो %ारंभ म> साव जिनक %Zथापना अथवा आगे साव जिनक %Zथापना (िजसम> ऋण िल खत भी शािमल है) और अविध ऋण का %योग उन उqेrय) के िलए कया गया िजसके ि लए वे उगाहे गए थे। यद नहW तो िववरण मद िवलंब अथवा चूक और तMपPाMवतs प1रशोधन, यद कोई हो जो लागू  कया जा सके , सूिचत कर>। (x ) Xया कोई कपट कं पनी $ारा या इसके अिधका1रय) अथवा कम च ा1रय) $ारा कं पनी से कोई कपट क! जानकारी या सूचना वष के दौरान आई है, यद हां, तो उसक! %कृ ित एवं िनिहत रकम को दशा या जाना चािहए। (xi ) Xया धारा 197 प1ठत अनुसूची 5 कं पनी अिधिनयम $ारा अिधदेिशत अपेि?त अनुमोदन) के अनुसार कोई %बंधक!य पा1रtिमक अदा अथवा %दान कया गया है, यद नहW, िनिहत रािश का िववरण तथा उसक! वापसी िनिPत करने हेतु कं पनी $ारा उठाए गए कदम का िववरण द>। (xii ) Xया िनिध कं पनी ने िनवल धा1रत िनिध और जमा[ का अनुपा त 1:20 म> रखने का अनुपालन कया है िजससे दाियMव पूरा कया जाए और Xया िनिध कं पनी दस %ितशत भारमु( िनिध िनयम, 2014 म> यथािविनaदb आविधक जमा रख रही है िजससे दाियMव को पूरा कया जा सके । (xiii ) Xया सभी संबंिधत प?कार के साथ संSवहार कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 177 और धारा 188 जहां लागू है, के अनुसार अऩुपालन हो रहा है और लागू लेखा मानक) जहां आवrयक हो का %क1रत िव&ीय िववरण म> कर दया गया है जैसा कं पनी अिधिनयम, 2013 के अंतग त िविहत लेखा मानक) $ारा स ंकिलत है। (xiv ) Xया कं पनी ने शेयर) का कोई अिधमान आबंटन अथवा %ाइवेट Zथ ापन या पूण तः या भागत सं%वत नीय िडब>बर) समी?ाधीन वष के दौरान कया है यद ऐसा है तो Xया कं पन ी अिधिनयम, 2013 क! धारा 42 क! अपे?ा का अनुपालन कया गया और उगाही गई रािश का %योग उन उqेrय) के िलए  कया गया िजसके िलए वह उगाही गई थी। यद नहW तो अंतव िलत रािश और गैर अनुपालन क! %कृ ित का संकलन द>। (xv ) Xया कं पनी िनदेशक) या उनसे जुड़े Sि(य) के साथ गैर धन संSवहार कया है यद ऐसा है तो Xया कं पनी अिधिनयम, 2013 क! धारा 192 के उपाबंध का अनुपालन कया गया है। (xvi) Xया कं पनी को भारतीय 1रजव बQक अिधिनयम 1934 क! धारा 4 5-आईए के अंतग त रिजZuीकृ त होना आवrयक है और यद ऐसा है तो Xया रिजZuीकरण अिभ%ाJ कया गया है। 4. ितकू ल या सापे उ1र+ के िलए कारण -दया जाना. 4. ितकू ल या सापे उ1र+ के िलए कारण -दया जाना. 4. ितकू ल या सापे उ1र+ के िलए कारण -दया जाना. 4. ितकू ल या सापे उ1र+ के िलए कारण -दया जाना. – –– – (1) जहां लेखापरी?क) क! 1रपोट म> पैरा 3 म> िनaदb कसी भ ी %v का उ&र %ितकू ल या सापे? है वहां लेखापरी?क क! 1रपोट म> ऐसा यथािZथित %ितकू ल या सापे? उ&र का आधार भी कथन देना होगा। (2) जहां लेखापरी?क कसी िविनaदb मामले पर राय S( करने म> असमथ है वहां उसक! 1रपोट म> ऐसे तwय के साथ वे कारण भी दशा ने ह)गे क ऐसी राय दcशत करना उसी के िलए स ंभव Xय) नहW है। [फा.सं. 17/45/2015-सीएल.V] अमरदीप xसह भा1टया, संयु( सिचव 4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(ii)] MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS ORDER New Delhi, the 29th March, 2016 S.O. 1228(E).— In exercise of the powers conferred by sub-section (11) of section 143 of the Companies Act, 2013 (18 of 2013 ) and in supersession of the Companies (Auditor's Report) Order, 2015 published in the Gazette of India, Extraordinary, Part II, Section 3, Sub-secti on (ii), vide number S.O. 990 (E), dated the 10th A pril, 2015, except as respects things done or omitted to be done before s uch supersession, the Central Government, after con sultation with the, committee constituted under proviso to sub-section (11) of section 143 of the Companies Act, 2013 here by makes the following Order, namely:— 1. Short title, application and commencement. - (1) This Order may be called the Companies (Audit or's Report) Order, 2016. (2) It shall apply to every company including a fo reign company as defined in clause (42) of section 2 of the Companies Act, 2013 (18 of 2013) [hereinafter refer red to as the Companies Act], except– (i) a banking company as defined in clause (c) of s ection 5 of the Banking Regulation Act, 1949 (10 of 1949); (ii) an insurance company as defined under the Insu rance Act,1938 (4 of 1938); (iii) a company licensed to operate under section 8 of the Companies Act; (iv) a One Person Company as defined under clause (62) of section 2 of the Companies Act and a small company as defined under clause (85) of section 2 of the Compa nies Act; and (v) a private limited company, not being a subsidi ary or holding company of a public company, having a paid up capital and reserves and surplus not more than rupe es one crore as on the balance sheet date and which does not have total borrowings exceeding rupees one crore from an y bank or financial institution at any point of time during the financial year and which does not have a total reve nue as disclosed in Scheduled III to the Companies Act, 2013 (including revenue from discontinuing operations) exceeding rupees ten crore during the financial year as per the financial statements. 2. Auditor's report to contain matters specified i n paragraphs 3 and 4. - Every report made by the auditor under section 143 of the Companies Act, 2013 on the accounts of every company audited by him, to which this Order applies, for the financial years commencing on or a fter 1st April, 2015, shall in addition, contain the matters specified in paragraphs 3 and 4, as may be applicable: Provided the Order shall not apply to the auditor’s report on consolidated financial statements. 3. Matters to be included in the auditor's report. - The auditor's report on the accounts of a company to which this Order applies shall include a statement on the foll owing matters, namely:- (i) (a) whether the company is maintaining proper r ecords showing full particulars, including quantitative details and situation of fixed assets; (b) whether these fixed assets have been physically verified by the management at reasonable intervals ; whether any material discrepancies were noticed on such verific ation and if so, whether the same have been properl y dealt with in the books of account; (c) whether the title deeds of immovable properties are held in the name of the company. If not, provi de the details thereof; (ii) whether physical verification of inventory has been conducted at reasonable intervals by the management and whether any material discrepancies were noticed and if so, whether they have been properly dealt with in the books of account; (iii) whether the company has granted any loans, se cured or unsecured to companies, firms, Limited Liability Partnerships or other parties covered in the regist er maintained under section 189 of the Companies Ac t, 2013. If so, (a) whether the terms and conditions of the grant of su ch loans are not prejudicial to the company’s interest; (b) whether the schedule of repayment of principal and payment of interest has been stipulated and whether the repayments or receipts are regular; (c) if the amount is overdue, state the total amoun t overdue for more than ninety days, and whether reasonable steps have been taken by the company for recovery of the principal and interest; (iv) in respect of loans, investments, guarantees, and security whether provisions of section 185 and 186 of the Companies Act, 2013 have been complied with. If not , provide the details thereof. ¹Hkkx IIµ[k.M 3(ii)º Hkkjr dk jkti=k % vlk/kj.k 5 (v) in case, the company has accepted deposits, whether the directives issued by the Reserve Bank of India and the provisions of sections 73 to 76 or any other releva nt provisions of the Companies Act, 2013 and the r ules framed thereunder, where applicable, have been complied wi th? If not, the nature of such contraventions be stated; If an order has been passed by Company Law Board or National Co mpany Law Tribunal or Reserve Bank of India or any court or any other tribunal, whether the same has been compl ied with or not? (vi) whether maintenance of cost records has been s pecified by the Central Government under sub-section (1) of section 148 of the Companies Act, 2013 and whether such accounts and records have been so made and ma intained. (vii) (a) whether the company is regular in depositing undisp uted statutory dues including provident fund, employees' state insurance, income-tax, sales-tax, service tax, duty of customs, duty of excise, value added tax, cess and any other statutory dues to the appropriate authori ties and if not, the extent of the arrears of outstanding statutory dues as on the last day of the financial year concerned for a period of more than six months from the date the y became payable, shall be indicated; (b) where dues of income tax or sales tax or servic e tax or duty of customs or duty of excise or value added tax have not been deposited on account of any dispute, then the amounts involved and the forum where dispute is pending shall be mentioned. (A mere representation to the concerned Department shall not be treated as a dispute). (viii) whether the company has defaulted in repayme nt of loans or borrowing to a financial institution, bank, Government or dues to debenture holders? If yes, th e period and the amount of default to be reported (in case of defaults to banks, financial institutions, and Government, l ender wise details to be provided). (ix) whether moneys raised by way of initial public offer or further public offer (including debt instruments) and term loans were applied for the purposes for which those are raised. If not, the details together with delays or default and subsequent rectification, if any, as may be applica ble, be reported; (x) whether any fraud by the company or any fraud on the Company by its officers or employe es has been noticed or reported during the year; If yes, the nature and the amount involved is to be indicated; (xi) whether managerial remuneration has been paid or provided in accordance with the requisite approvals mandated by the provisions of section 197 read with Schedule V to the Companies Act? If not, state the amount involved and steps taken by the company for securing refund of the same; (xii) whether the Nidhi Company has complied with t he Net Owned Funds to Deposits in the ratio of 1: 20 to meet out the liability and whether the Nidhi Company is maintaining ten per cent unencumbered term deposits as specified in the Nidhi Rules, 2014 to meet out the liability; (xiii) whether all transactions with the related pa rties are in compliance with sections 177 and 188 of Companies Act, 2013 where applicable and the details have been dis closed in the Financial Statements etc., as required by the applicable accounting standards; (xiv) whether the company has made any preferential allotment or private placement of shares or fully or partly convertible debentures during the year under review and if so, as to whether the requirement of section 42 of the Companies Act, 2013 have been complied with and the amount raised have been used for the purposes for which the funds were raised. If not, provide the details in r espect of the amount involved and nature of non-com pliance; (xv) whether the company has entered into any non-c ash transactions with directors or persons connected with him and if so, whether the provisions of section 192 of Companies Act, 2013 have been complied with; (xvi) whether the company is required to be registered un der section 45-IA of the Reserve Bank of India Act, 1934 and if so, whether the registration has been obtain ed. 4. Reasons to be stated for unfavourable or qualif ied answers.- (1) Where, in the auditor's report, the answer to a ny of the questions referred to in paragraph 3 is unfa vourable or qualified, the auditor's report shall also state the basis for such unfavourable or qualified answer, as the case may be. (2) Where the auditor is unable to express any opin ion on any specified matter, his report shall indicate such fact together with the reasons as to why it is not possible for h im to give his opinion on the same. [F. No. 17/45/2015-CL-V] AMARDEEP SINGH BHATIA, Jt. Secy. Uploaded by Dte. of Printing at Government of Indi a Press, Ring Road, Mayapuri, New Delhi-110064 and Published by the Controller of Publications, Delhi-110054.




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