banner_ad

Filing of ITR for non audit individuals ( hindi)

ITR Filing 912 views 3 replies

व्यक्तिगत करदाता जो ऑडिट की श्रेणी में नहीं आते हैं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है।



31 जुलाई में मात्र कुछ ही दिन शेष रह गए हैं एवं यदि आप अभी तक अपने आयकर रिटर्न दाखिल करने संबंधी दस्तावेज एवं जानकारी नहीं जुटा पाएँ हैं तो अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर निम्न जानकारी तुरंत जुटा लें।



1. विभिन्न मदों से प्राप्त आय/ लाभ/ हानि की गणना- सर्वप्रथम वित्तीय वर्ष 2010-11 में अर्जित विभिन्न मद जिसमें सेलेरी, हाउस प्रापर्टी, प्रॉफिट एंड गेन ऑफ बिजनेस या प्रोफेशन, केपिटल गेन, अन्य स्रोत आदि से प्राप्त आय/ लाभ/ हानि की गणना कर लें। उक्त मदों से अर्जित आय की गणना करते समय निम्न जानकारी आवश्यक रूप से जुटा लें। 



(ए) फार्म 16- यदि आप नौकरी-पेशा हैं तो अपने नियोक्ता से फार्म नं. 16 ले लें। फार्म नंबर 16 में सेलेरी मद से हुई आय का समावेश होता है एवं यदि नियोक्ता ने आपकी टीडीएस कटौती की है तो वह भी इसमें शामिल होती है। 



(बी) ब्याज का सर्टिफिकेट- यदि आपने होम लोन ले रखा है तो बैंक से वित्तीय वर्ष में चुकाए गए ब्याज का सर्टिफिकेट प्राप्त कर लें, जिसकी छूट धारा 24(बी) के तहत प्राप्त की जा सकती है। 



(सी) केपिटल गेन- यदि आपने धारा 54, 54-बी, 54-डी, 54-ईसी, 54-एफ, 54-जी एवं 54-जीए के तहत केपिटल गेन बचत के लिए निवेश किया है तो उसकी भी जानकारी जुटा लें। 



(डी) अन्य स्रोत- फिक्स्ड डिपॉजिट, एनएससी, केवीपी, डिविडेंड, रेस हार्स आदि से प्राप्त आय की जानकारी भी जुटा लें। साथ ही यदि अवयस्क बच्चों की भी कोई आय है तो उसे माता-पिता में से जिसकी आय अधिक हो उसमें जोड़ें। 



2. धारा 80-सी, 80-यू के तहत प्राप्त छूट-



(ए) धारा 80-सी, 80-सीसीसी एवं 80-सीसीडी के तहत छूट- आयकर अधिनियम की धारा 80-सी, 80-सीसीसी के तहत व्यक्तिगत करदाता रु. 1,00,000 तक का अनुमोदित निवेश/ अंशदान/ खर्च/ हाउसिंग लोन रिपेमेंट आदि की छूट प्राप्त कर सकते हैं। यदि वित्तीय वर्ष में आपने ईपीएफ/ पीपीएफ में अंशदान, एनएससी, टैक्स सेविंग एफडी, टैक्स सेविंग बॉण्ड, इंश्योरेंस प्रीमियम, ईएलएसएस या यूलिप आदि में निवेश किया है तो इससे संबंधित दस्तावेज एवं जानकारी जुटा लें। साथ ही यदि आपने वित्तीय वर्ष के दौरान बच्चों की पूर्णकालिक एजुकेशन की ट्यूशन फीस एवं किसी हाउस प्रॉपर्टी की खरीदी की गई हो तो उस पर चुकाए गए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की भी जानकारी जुटा लें। 



(बी) धारा 80-सीसीएफ के तहत छूट- यदि आपने धारा 80-सीसीएफ के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में निवेश किया है तो उसकी भी जानकारी जुटा लें। 



(सी) धारा 80-डी के तहत छूट- आयकर अधिनियम की धारा 80-डी के अंतर्गत स्वयं, पत्नी/ पति एवं बच्चों के मेडिक्लेम पॉलिसी की सालाना प्रीमियम या 15000 रुपए तक की आय में छूट प्राप्त की जा सकती है। साथ ही माता-पिता की मेडिक्लेम पॉलिसी की सालाना प्रीमियम या 15000 रुपए तक की भी अतिरिक्त छूट प्राप्त की जा सकती है। सीनियर सिटीजन होने की दशा में यह छूट 20000 रुपए तक प्राप्त की जा सकती है। यदि वित्तीय वर्ष में आपने उल्लेखित किसी भी पॉलिसी का प्रीमियम भुगतान किया है तो उसकी भी जानकारी जुटा लें। 



(डी) धारा 80-ई के तहत छूट- आयकर अधिनियम की धारा 80-ई के तहत व्यक्तिगत करदाता, शिक्षा लोन पर चुकाए गए ब्याज की राशि की आय में से छूट प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपने उल्लेखित ब्याज का भुगतान किया है तो उसकी भी जानकारी जुटा लें। 



(ई) धारा 80-जी, 80-जीजीए, 80-जीजीसी- यदि आपने आयकर अधिनियम की धारा 80-जी, 80-जीजीए, 80-जीजीसी के तहत कोई दान दिया है तो उससे संबंधित दस्तावेज एवं जानकारी भी जुटा लें। 



3. टीडीएस सर्टिफिकेट- कमीशन, ब्याज, किराए आदि पर यदि कोई टीडीएस कटौती हुई हो तो संबंधित व्यक्ति से उसका टीडीएस सर्टिफिकेट प्राप्त कर लें।



4. एडवांस टैक्स- यदि वित्तीय वर्ष में आपने कोई एडवांस टैक्स जमा किया है तो उसकी जानकारी भी एकत्र कर लें।



5. एक्जेम्ट इनकम- विभिन्न आय जैसे सिक्यूरिटी पर लांग टर्म केपिटल गेन, डिविडेंट, खेती की आय (रु. 5000 से कम) आदि एक्जेम्ट इनकम की श्रेणी में आती है, परंतु इनकी जानकारी भी रिटर्न में देना होती है, अतः इससे संबंधित जानकारी भी आवश्यक रूप से एकत्र कर लें। 



6. बैंक डिटेल- यदि आप टैक्स रिफंड के जरिए प्राप्त करना चाहते हैं तो बैंक की जानकारी के अलावा एमआयसीआर कोड भी सही रूप में भरा जाना आवश्यक होता है, अतः बैंक की संपूर्ण जानकारी के साथ एमआयसीआर कोड की भी जानकारी जुटा लें। 



७. टैक्स की गणना- विभिन्न मदों से अर्जित आय/ लाभ/ हानि की गणना कर सकल आय निकाल लें। उसके बाद धारा 80-सी से 80-यू तक की छूट घटाकर शुद्ध आय की गणना करें एवं टैक्स स्लेब अनुसार टैक्स की गणना कर 3 प्रतिशत की दर से टैक्स पर एजुकेशन सेस जोड़कर शुद्ध टैक्स निकाल लें। यदि आप स्वयं आय एवं टैक्स की गणना करने में सक्षम नहीं हैं तो कर सलाहकार/ सीए की मदद ले सकते हैं।



8. टैक्स डिपॉजिट- शुद्ध टैक्स की गणना करने के बाद टीडीए कटौती एवं एडवांस टैक्स का समायोजन करें एवं इसके बाद भी कोई टैक्स बाकी हो तो आयकर अधिनियम के प्रावधान के तहत बैलेंस टैक्स की राशि जमा करा दें।

Replies (3)

 

 
‘सहज’ से भरें रिटर्न
 
 
 
वित्त वर्ष 2010-11 के संदर्भ में आकलन वर्ष 2011-12 के लिए सरकार ने नए आयकर रिटर्न फार्म ‘सहज’ (आईटीआर-1) उपलब्ध कराए हैं। नए सहज फार्म का इस्तेमाल वह व्यक्तिगत करदाता कर सकता है, जिसकी कुल आय में वेतन एवं पेंशन, हाउस प्रापर्टी और अन्य स्रोतों से हुई आमदनी शामिल हो। हालांकि, जिन करदाताओं ने पिछले साल हुए हाउस प्रापर्टी के नुकसान को इस साल भी दर्शाया है, वह नए रिटर्न फार्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसी तरह, ऐसे करदाता जिन्हें लॉटरी और रेस कोर्स से आमदनी हुई हो, वह भी इस नए आयकर रिटर्न फार्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। वहीं आयकर रिटर्न भरते समय करदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने जीवनसाथी या नाबालिग बच्चों को प्राप्त हुई आय का भी ब्योरा दें।

यदि किसी करदाता को दो से अधिक हाउस प्रापर्टी या पूंजीगत लाभ या व्यवसाय या पेशे से आमदनी होती है, तो वह नए रिटर्न फार्म सहज का इस्तेमाल आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए नहीं कर सकता है। इसके अलावा, यह जरूर जान लें कि खेती-किसानी से हुई आय पूरी तरह आयकर से मुक्त है। यदि किसी व्यक्तिगत करदाता की कृषि से होने वाली आमदनी 5,000 रुपये से अधिक है तो वह भी रिटर्न दाखिल करने के लिए सहज फार्म का प्रयोग नहीं कर सकता है। पिछले साल के आयकर रिटर्न फार्म नं. 1 और नए रिटर्न फार्म सहज में यहां कुछ मुख्य अंतर स्पष्ट किए गए हैं-

1- नए आईटीआर-1 का नाम सहज है, जबकि पिछले साल के आईटीआर- 1 को सरल-2 कहा गया था।
2- नया आयकर रिटर्न फार्म केवल लाल और काली स्याही में प्रिंट किया गया है।
3- यदि करदाता इसे डाउनलोड करना चाहे तो वह इसे कलर प्रिंट कर सकता है।
4- नए रिटर्न फार्म के केवल काले रंग में जेराक्स प्रति का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
5- फार्म आयकर विभाग की वेबसाइट पर हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है।
करदाता द्वारा रिटर्न फार्म को बार कोड या इलेक्ट्रिक फार्म के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है। यह अवश्य याद रखें कि आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2011 

 

 केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( सीबीडीटी) ने भले ही पांच लाख तक की सालाना आय वाले वेतनभोगियों को आयकर रिटर्न भरने से छूट दे दी हो, लेकिन ऎसे कई वेतनभोगी रिटर्न फाइल करने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। सीबीडीटी के इस आदेश का फायदा गिने-चुने लोगों को ही मिलेगा। ज्यादातर लोगों को फाइल करनी ही पड़ रही है। विशेष्ाज्ञों के अनुसार यह अघिसूचना ऎसे वक्त में आई है, जब नियोक्ता फार्म-16 तैयार कर चुके हैं और अपने कर्मचारियों को दे चुके हैं।

अघिसूचना में यह शर्त है कि आमदनी सिर्फ वेतन और बचत खाते पर दिए जाने वाले ब्याज से होनी चाहिए। इसके अलावा कहीं से भी आमदनी जुड़ी तो आपको रिटर्न तो फाइल करनी ही होगी। वरिष्ठ कर विशेष्ाज्ञ अनिल सिंह शेखावत का कहना है कि पांच लाख रूपए तक की आमदनी वाले वेतनभोगियों को रिटर्न से मुक्ति की घोष्ाणा राजनीतिक ज्यादा, व्यवहारिक कम है। केन्द्र सरकार ने सांकेतिक संदेश देने के लिए ही यह अघिसूचना जारी की है, इसका व्यवहारिक धरातल पर कोई फायदा होता नहीं दिख रहा।

इनको भरनी होगी रिटर्न
कर बचाने के लिए एफडी में निवेश कर रखा है।
सेक्शन 80 सीसीएफ में छूट के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में निवेश किया है।
अपने मकान को कम से कम एक महीने के लिए भी किराए पर चढ़ाया है।
बीच में कही नौकरी बदली है।
वेतन और बचत खाते से मिलने वाले ब्याज के अलावा कहीं से और आमदनी होती है।

विशेषज्ञ की राय
विशेष्ाज्ञों के अनुसार थोड़े-बहुत लोग रिटर्न फाइल करने से बच सकते हैं, लेकिन ऎसे लोगों को भी लोन की जरूरत होती है या विदेश भी जाना पड़ सकता है। ऎसे में 3 साल की रिटर्न की जानकारी मांगी जाती है। तो ऎसे लोगों को रिटर्न भरनी पड़ेगी।

 केस-1
श्याम लाल सरकारी विभाग में यूडीसी पद पर हैं। उनकी साल भर की आमदनी सैलेरी से करीब 4 लाख 80 हजार रूपए बैठती है। घर के बड़े हिस्से को उन्होंने किराए पर दे रखा है। पांच लाख रूपए तक की आमदनी के बावजूद उन्हें आयकर रिटर्न भरनी पड़ रही है।

 केस-2
रजत शर्मा निजी कम्पनी में एक्जीक्यूटिव हैं। उनकी सालाना सैलेरी भी साढ़े तीन लाख रूपए के आसपास है, लेकिन इसके बावजूद उनकों आयकर रिटर्न फाइल करने के लिए जाना पड़ा। आयकर विभाग की घोष्ाणा का उन्हें फायदा नहीं हो रहा है। 

 

 

 

क्या मृतक का भी रिटर्न फाइल करना होगा

 

आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत मृत की आय पर टैक्स अदा करने का दायित्व उसी प्रकार होता है, जिस प्रकार किसी जीवित व्यक्ति का दायित्व होता है। साथ ही, रिटर्न दाखिल करने संबंधी जो प्रावधान जीवित व्यक्ति पर लागू होते हैं, वही मृतक पर भी लागू होते हैं। बस फर्क इतना होता है कि जीवित व्यक्ति स्वयं/अधिकृत व्यक्ति द्वारा अपनी आय पर टैक्स अदा कर रिटर्न दाखिल करता है, परंतु मृतक की दशा में लीगल रिप्रेजेंटेटिव/निष्पादक को टैक्स अदा करने एवं रिटर्न दाखिल करने का दायित्व होता है।


लीगल रिप्रेजेंटेटिव/निष्पादक द्वारा मृतक की आय पर तब तक टैक्स चुकाने एवं रिटर्न दाखिल करने का दायित्व होता है, जब तक कि मृतक की संपत्ति पूर्ण रूप से वारिसों के मध्य विभाजित नहीं हो जाए अथवा मृतक की संपत्ति पर आय बंद न हो जाए।


मृतक का रिटर्न दाखिल करते समय उन सभी कटौतियों का लाभ ले सकते हैं, जो जीवित व्यक्ति पर लागू होती हैं।


लीगल रिप्रेजेंटेटिव/निष्पादक अपनी स्वयं की आय पर पृथक रूप से टैक्स अदा कर रिटर्न दाखिल कर सकता है।


आयकर अधिनियम की धारा १५९ एवं १६८ में विभिन्न परिस्थितियों में किस व्यक्ति का मृतक की आय पर टैक्स अदा कर रिटर्न दाखिल करने का दायित्व है, का उल्लेख किया गया है, वह निम्न प्रकार है-


* वसीयत निष्पादित नहीं होने की दशा मेंआयकर अधिनियम की धारा १५९ के तहत यदि मृतक द्वारा वसीयत निष्पादित नहीं की गई है तो मृतक के लीगल रिप्रेजेंटेटिव को मृतक की आय पर टैक्स अदा करने एवं रिटर्न दाखिल करने का दायित्व होता है। 


यदि मृतक का एक ही वारिस है तो वह लीगल रिप्रेंजेंटेटिव होगा, परंतु एक से अधिक वारिसों की स्थिति में सभी वारिसों के मध्य सहमति होकर एक को आयकर संबंधी कार्य के लिए लीगल रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया जाएगा।


आयकर अधिनियम की धारा १६७ के तहत लीगल रिप्रेजेंटेटिव को अन्य वारिसों के हिस्से से उनके हिस्से के बराबर टैक्स की राशि वसूलने का अधिकार होगा। 


* वसीयत निष्पादित होने की दशा मेंआयकर अधिनियम की धारा १६८ के तहत यदि मृतक ने वसीयत निष्पादित कर निष्पादक की नियुक्ति की है तो निष्पादक को मृतक की आय पर टैक्स अदा करने एवं रिटर्न दाखिल करने का दायित्व होता है। साथ ही धारा १६९ एवं १६२ के तहत निष्पादक को अधिकार होता है कि मृतक की संपत्ति में से टैक्स की अदा की गई राशि वसूल कर सकता है। 


अतः यदि आप किसी मृतक के लीगल रिप्रेजेंटेटिव अथवा निष्पादक की श्रेणी में आते हैं तो मृतक की आय पर अनिवार्य रूप से टैक्स अदा कर नियत तिथि के पूर्व आयकर रिटर्न दाखिल करें।


CCI Pro

Leave a Reply

Your are not logged in . Please login to post replies

Click here to Login / Register  

Related Topics
Loading
Company
ARTICLESHIP 15 May 2026
ARTICLE ASSISTANT, TRAINEE AND PAID ASSISTANT

YOGESH KAPOOR AND ASSOCIATES

New Delhi

B.Com

View Details
Company
26 May 2026
CA / MBA (Finance) / CMA / M.Com (Finance)

Sri Aurobindo Gnostic Centre of Education

New Delhi

CA

View Details
Company
ARTICLESHIP 08 June 2026
Internal & Taxation Article

O P Bagla & Co LLP

New Delhi

CA Inter

View Details
Company
ARTICLESHIP 15 May 2026
Audit Assistant / Article Trainee / Intern

SSGS and Associates

Chennai

CA Inter

View Details
Company
ARTICLESHIP 14 May 2026
CA ARTICLE

PRAVEEN GARG & CO

Faridabad

CA Foundation

View Details
Company
26 May 2026
Senior Accountant cum purchase Manager

Vardhaman Group of India

Pimpri Chinchwad

CA Inter

View Details
Company
ARTICLESHIP 31 May 2026
Article Assistant

KPRS And Associates

New Delhi

CA Inter

View Details
Company
23 May 2026
Article Assistant

Geeta Manchanda & CO.

New Delhi

CA Inter

View Details