Poem on anna ji

Inspirational 2827 views 44 replies

Friends right now I am leaving for RamLila Maidan to support a noble cause that is fight against corruption. 

Hopefully I will come back  at 5.30pm to support Candlelight March at Laxmi Nagar too. I request you all to join us in large numbers.

Before leaving I want to dedicate this poem to Anna ji and his struggle

हज़ारे जी की ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर भ्रष्टाचारियों का दम निकले, 
बहुत निकला भ्रष्टाचारियों पर जनता का गुस्सा लेकिन फिर भी कम निकले. 

डर जाए हर भ्रष्टाचारी अब क्योंकि लोकपाल पकड़ेगा उसकी गर्दन को, 
वो नेता और बाबू जो कानून से उम्र भर आसानी से बच निकले. 

निकलना बेईमानो का मंत्रिमंडल से सुनते आये हैं लेकिन, 
बहुत बे आबरु होकर कुछ और मंत्री मंत्रिमंडल से अब निकलें. 

भ्रम टूट जाए नेताओं का कि अब भी बच सकते हैं वो जनता से, 
अपने दिन गिन लें वो जिनकी तरफ अन्ना के कदम निकले. 

अगर लिखना है देश का इतिहास फिर से तो समझ लो यह, 
हो सुबह जैसे ही तो बाँध कर कफ़न घर से हम निकलें 

हुई है कितने सालों से जनता से सिर्फ बेईमानी ही बेईमानी रोज़, 
अब आया है यह ज़माना जब जनता इन्साफ करने घर से निकले. 

करी थी जिनसे उम्मीद हमने देश को आगे बढ़ाने कि, 
देश के वो नेता ही सबसे ज्यादा खुदगर्ज़ हैं निकले. 

पड़ता नहीं है जिसको फर्क जीने और मरने से, 
उस अन्ना के पीछे देश का हर बच्चा-बच्चा शान से निकले. 

करो वह वार बेईमानी पर कि हर बेईमान डर जाए, 
कहे काँपता हुआ यह कि लोकपाल के डर से दम निकले. 

देश के वास्ते यह बीड़ा है उठाना मिलकर हम सब को, 
कहीं बोलें न बच्चे कल कि पापा तो कायर निकले. 

अभी तो दूर है सपना भ्रष्टाचार मुक्त भारत का, 
मगर वह दिन भी लायेंगे यह कसम खा कर हैं हम निकले

Replies (44)

The above mentioned poem is written by my elder brother Abhishek Gupta who is a SAP consultant working with PATNI Computers.

अभी तो दूर है सपना corruption-free India,  
but we swear it came out the day will bring

 

Thank you Abhishek & Pulkit for sharing a good poem!

 

 

Thank You Abhishek & Pulkit for sharing a good poem !

 

 

The 2nd Independence movement with Anna Hazare:)

https://2media.nowpublic.net/images//a2/62/a26254237b5a602d9cdbc12cef6e088e.jpg

 

I AM WITH ANNAJI....

Originally posted by : Pulkit Gupta



हज़ारे जी की ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर भ्रष्टाचारियों का दम निकले, 
बहुत निकला भ्रष्टाचारियों पर जनता का गुस्सा लेकिन फिर भी कम निकले. 

डर जाए हर भ्रष्टाचारी अब क्योंकि लोकपाल पकड़ेगा उसकी गर्दन को, 
वो नेता और बाबू जो कानून से उम्र भर आसानी से बच निकले. 

निकलना बेईमानो का मंत्रिमंडल से सुनते आये हैं लेकिन, 
बहुत बे आबरु होकर कुछ और मंत्री मंत्रिमंडल से अब निकलें. 

भ्रम टूट जाए नेताओं का कि अब भी बच सकते हैं वो जनता से, 
अपने दिन गिन लें वो जिनकी तरफ अन्ना के कदम निकले. 

अगर लिखना है देश का इतिहास फिर से तो समझ लो यह, 
हो सुबह जैसे ही तो बाँध कर कफ़न घर से हम निकलें 

हुई है कितने सालों से जनता से सिर्फ बेईमानी ही बेईमानी रोज़, 
अब आया है यह ज़माना जब जनता इन्साफ करने घर से निकले. 

करी थी जिनसे उम्मीद हमने देश को आगे बढ़ाने कि, 
देश के वो नेता ही सबसे ज्यादा खुदगर्ज़ हैं निकले. 

पड़ता नहीं है जिसको फर्क जीने और मरने से, 
उस अन्ना के पीछे देश का हर बच्चा-बच्चा शान से निकले. 

करो वह वार बेईमानी पर कि हर बेईमान डर जाए, 
कहे काँपता हुआ यह कि लोकपाल के डर से दम निकले. 

देश के वास्ते यह बीड़ा है उठाना मिलकर हम सब को, 
कहीं बोलें न बच्चे कल कि पापा तो कायर निकले. 

अभी तो दूर है सपना भ्रष्टाचार मुक्त भारत का, 
मगर वह दिन भी लायेंगे यह कसम खा कर हैं हम निकले

 

Thank You Abhishek & Pulkit for sharing a nice poem !

Thanks Pulkit for sharing this.

Thanks everyone for the appreciation.

करो वह वार बेईमानी पर कि हर बेईमान डर जाए, कहे काँपता हुआ यह कि लोकपाल के डर से दम निकले. Nice Composition.... Thankx for Sharing.....

Nice poem,def anna wil win,gr8 2 hear dat u hv joined in der activities,let's al join hands 2gthr n let's free our land 4m corruption,Anna ji hat's of 2 u,all indian's came 2 knw abt d corruption{blak mny} nly coz of u,ur d legend of dis century.

Anna Hazare is unmarried. He lives in a small room attached to the Sant Yadavbaba temple in Ralegan Siddhi since 1975. He never visited his home though it is in same village. On 16 April 2011, he declared his bank balance of INR67,183 (US$1,500) and INR1,500 (US$30) as money in hand.[143] He owns 0.07 hectares of family land in Ralegan Siddhi which is being used by his brothers. Two other pieces of land donated to him by the Indian Army and by a villager have been donated by him for village use.[144] He receives only a pension from the Indian army as income.

Originally posted by : rahul
Thank You Abhishek & Pulkit for sharing a good poem !

thanx pulkit & abhishek

Chanakya in his famous book on public administration, 'ARTHASHASTRA' commented that no matter what you do, there will remain 40 types of corruption in a Government. But we are accustomed to perhaps 40,000 types of it or more.

What Anna Hazare has started must not end with a good Jan Lokapal Act. We must take oath that from now on we won't tolerate corruption at lower levels also.

Protest against corruption and graft in everyday life with whatever intensity you could gather.Wish to see us meet in a less corrupt India in near future.

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

 

 

Nicely assimilated in the original version by my favourite poet... Mirza Ghalib ji...!!!

 

पड़ता नहीं है जिसको फर्क जीने और मरने से, 
उस अन्ना के पीछे देश का हर बच्चा-बच्चा शान से निकले. 

 

However... it's just a suggestion that in the above line if you wud have used the word बच्चा once then the rhyme cud have been mainteined... Coz except a place or two... the rhyme has been indubitably maintained... Kudos...!!! Thanks...

 

 

INDIA AGAINST CORRUPTION !!!

hey.. i was in laxmi nagar one hour ago... i wish ye post pehle dekhti ......wud have joined u for sure ....

 

Thanx..... Great poem.....


CCI Pro

Leave a Reply

Your are not logged in . Please login to post replies

Click here to Login / Register