Reallity

मकान चाहे कच्चे थे लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे... ..

चारपाई पर बैठते थे पास पास रहते थे... ...............

सोफे और डबल बेड आ गए दूरियां हमारी बढ़ा गए....

छतों पर अब न सोते हैं बात बतंगड अब न होते हैं.. ..

आंगन में वृक्ष थे सांझे सुख दुख थे... ....................

दरवाजा खुला रहता था राही भी आ बैठता था... ......

कौवे भी कांवते थे मेहमान आते जाते थे... ...........

इक साइकिल ही पास थी फिर भी मेल जोल था.....

रिश्ते निभाते थे रूठते मनाते थे... ....................

पैसा चाहे कम था माथे पे ना गम था... ..............

 

मकान चाहे कच्चे थे # रिश्ते सारे सच्चे थे... अब शायद कुछ पा लिया है पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया.

Replies (2)
Beautiful poem.....meaningful.....thanks

yaaa.... terrace p sleeping... jb hum chotte the.. i reallly miss those things.. bachpannn 

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