Guest
Posted on 11 February 2011
मतलब चाहे सुख हो या दुःख, ख़ुशी हो या गम, हमे खुद को ऐसा बनाना है के हम पर इन सब का गहरा प्रभाव न पड़े| हमे ख़ुशी में खुद को भुलाना नहीं है न ही गम में इतना निराश और दुखी होना है के हम अपनी ज़िन्दगी के असली मकसद तो भूल जाए|